गौरैया पक्षी की जानकारी Sparrow Bird Information in Hindi, Goraiya 2022

गौरैया पक्षी की जानकारी Sparrow Bird Information in Hindi, Gauraiya, Goraiya 2022
गौरैया पक्षी की जानकारी Sparrow Bird Information in Hindi,

Sparrow Bird Information in Hindi: (Gauraiya) घरेलू गौरैया, पक्षियों के राहगीर परिवार की एक जैविक प्रजाति है, जो दुनिया के अधिकांश हिस्सों में पाई जाती है। शुरुआत में यह एशिया, यूरोप और भूमध्य सागर के तटीय क्षेत्रों में पाइए जाती थी। लेकिन इंसानों ने इसे पूरी दुनिया में फैला दिया है। यह इंसानों के निकट कई स्थानों पर रहती है और शहरी बस्तियों में रहती है।

(Gauraiya) गौरैया पक्षी की जानकारी (Sparrow Bird Information in Hindi)

शहरी क्षेत्रों में गौरैयों (Gauraiya) की केवल छह प्रजातियां ही पाई जाती हैं। ये हैं हाउस स्पैरो, स्पैनिश स्पैरो, सिंध स्पैरो, रसेल स्पैरो, डेड सी स्पैरो और ट्री स्पैरो। इनहे घर की गौरैया कहा जाता है। यह गांव में बहुत अधिक संख्या मे पाया जाता है। आज यह दुनिया में सबसे ज्यादा पाए जाने वाले पक्षियों में से एक है, लोग जहां भी घर बनाते हैं, देर-सबेर गौरैया के जोड़े वहां रहने के लिए पहुंच जाते है।

गौरैया एक छोटी सी चिड़िया होती है। इसका रंग हल्का भूरा या सफेद होता है। इसके शरीर पर छोटे-छोटे पंख और पीले रंग की चोंच और पैर पीले रंग के होते हैं। नर गौरेया की पहचान उसके गले में काले धब्बे से होती है। 14 से 16 सेमी. यह लंबी पक्षी इंसानों के घरों के आसपास रहना पसंद करता है।

लेकिन गौरैया पहाड़ी इलाकों में कम दिखाई देती है। यह शहरों, कस्बों, गांवों और खेतों के आसपास बहुत अधिक संख्या में पाया जाता है। नर गौरैया के सिर के ऊपरी भाग, निचले भाग और गालों पर भूरे रंग होता है।

मादा गौरैया (Gauraiya)

गला या चोंच और आँखों का रंग काला होता है। और पैर भूरे रंग के होते हैं। मादा के सिर और गले पर कोई भूरा रंग नहीं होता है। नर गौरैया को पक्षी और मादा गौरैया या पक्षी भी कहा जाता है। 

Goraiya घटती हुई संख्या (Sparrow Bird Information in Hindi)

पिछले कुछ सालों में शहरों में गौरैया की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त की जा रही है। आधुनिक घरो और बहुमंजिला इमारतों के कारण गौरैयों को पुराने घरों की तरह रहने के लिए जगह नहीं मिलती। सुपरमार्केट कल्चर के कारण पुरानी किराना की दुकान से कम होती जा रही हैं। इसके कारण गौरैया को अनाज नहीं मिल पाता है।

इसके अलावा मोबाइल टावरों से निकलने वाली तरंगें भी गौरैयों के लिए नुकसान पहुचाती हैं। ये तरंगें पक्षी की दिशा खोजने की दिमाग पर असर डालती हैं। और उनके प्रजनन पर भी बहुत जादा नुक्सान पहुचाता है, जिसके कारण गौरैया तेजी से कम होती जा रही है। गौरैयों को घास के बीज बहुत पसंद होते हैं जो शहरी क्षेत्रों की तुलना में गाँव के क्षेत्रों में आसानी से मील जाता हैं.

गौरैया गर्मी या तापमान को सहन नहीं कर सकती हैं। प्रदूषण और रेडिएशन के बाद से शहरों का तापमान बढ़ रहा है। धार्मिक जगह पर कबूतरों को अधिक महत्व दिया जाता है। लेकिन गौरैयों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. खाने की तलाश में और गौरैयों के घोंसले शहर से दूर चले जा रहे हैं और अपने नए घर को ढूंढते हैं। इनकी घटती संख्या का एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि जंगल काफ़ी कम होते जा रहे हैं। 

इसलिए मांसाहारी पक्षियों ने शहरों, गांवों में अपनी जगह बना ली है, जहां हजारों-लाखों की संख्या में गौरैया रहती थी, अक्सर हमारे घरों, के छतों और गलियों में छोटे-छोटे चील बैठे नजर आते हैं। जो बड़ी आसनी से इनका शिकार कर लेते हैं. गौरैया पक्षी इन शिकारी पक्षियों का सामना नहीं कर पाती हैं। 

गौरैया की 7 बातें (Sparrow Bird Information in Hindi)

1. हर साल दुनिया में अलग-अलग हिस्सों में (20 मार्च को वर्ल्ड स्पैरो यानी विश्व गौरैया दिवस) मनाया जाता है, गौरैया संरक्षण अभियान या गौरैया बचाओ अभियान को सफल बनाया गया, 2012 में घरेलू गौरैया को दिल्ली सरकार या बिहार सरकार राजकीय पक्षी घोषित किया है।

2. गौरैया एक छोटा पक्षी है, जो इसकी औसत लंबाई 16 सेंटीमीटर है, 6,3″ इंच वजन है। गौरैया चिड़िया 24 से 40 ग्राम कि होती है, वैज्ञानिकों के मुताबिक इसकी 24 प्रजातियां पाई जाती है, पिछले कुछ सालों में जनसंख्या में 80 फीसद की कमी आई है, नर या मादा गौरैया को उनके रंग के आधार पर पहचाना जा सकता है, नर गौरैया की पीठ पर तमाकू रंग की और गर्दन काले रंग की पतली पट्टी होती है, जो कि मादाओं के पीठ पर और गले पर भूरे रंग की पतली पट्टी होती है।

3. गोरैया आमतौर पर प्रति घंटा 38 किलोमीटर की रफ्तार से उड़ सकते हैं, लेकिन खतरे की समय मैं प्रति घंटे 50 किलोमीटर की रफ्तार से तेज उड़ सकते हैं, गोरैया प्राकृतिक रूप से मांसाहारी होते हैं, लेकिन इंसान के करीब रहने से उन्होंने अपनी आदत बदल दि है, और गौरैया चिड़िया का खाना मुख्य रूप से पतंगे कीड़े और जामुन या फल आदी खाते हैं।

4. 1950 के दौरान मैं चीन की सरकार ने लागू किया गौरैया को मारने का अभियान शुरू किए गए गौरैया फसल खा जाते थी अभियान के खत्म होते ही, नतीजे जो उल्टी हो गए लागू गौरैया को मारने के बाद चीन में फसल कीड़ो ने खाना शुरु कर दिया जिसके कारण अकाल जैसे हालात हो गई।

5. गौरैया के बहुत कम अंडे मे अपने माता पिता का डीएनए होता है, ज्यादातर केवल उनकी मां का डीएए होता है, घोंसला बनाने की जिम्मेदारी नर गौरैया की होती है, और घोंसला बनाते समय मादा गौरैया को रिझाने की कोशिश करते हैं।

6. एक मादा गौरैया हर साल 3 से 5 अंडे देती है, और 12 से 15 दिन के बाद अंडे मेसे बच्चा जन्म लेते हैं, नर या मादा मिलकर अपने बच्चों का ख्याल रखते हैं, अपने जन्म के 15 दिनों के बाद इतने काबिल हो जाते हैं, कि वह अपने घोषणा छोड़ सकते हैं। गौरैया की औसत 4 से 5 साल तक जीवित रह सकते हैं, लेकिन डेनमार्क में एक गौरैया 19 साल 9 महीने तक जीवित रही है, यह जंगली गौरैया की लिए वर्ल्ड रिकॉर्ड है।

7. गौरैया को पिंजरे में पालने से 12 से 15 साल तक जीवित रह सकते हैं लेकिन एक गौरैया का रिकॉर्ड 23 साल तक जीवित रहा है, अधिक तर गौरैया सुस्त रहती है, वह अपने जन्म स्थान से 2 किलोमीटर के अंतराल में रहती हैं, भले ही इनकी गिनती पानी के पक्षियों में नहीं होती है फिर भी उनके पास पानी में भी तैरने की शक्ति होती है।

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